Environment Essay Hindi Language

प्रदूषण पर निबंध / Essay on Pollution in Hindi!

प्रदूषण आज की दुनिया की एक गंभीर समस्या है । प्रकृति और पर्यावरण के प्रेमियों के लिए यह भारी चिंता का विषय बन गया है । इसकी चपेट में मानव-समुदाय ही नहीं, समस्त जीव-समुदाय आ गया है । इसके दुष्प्रभाव चारों ओर दिखाई दे रहे हैं ।

प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है-गंदगी । वह गंदगी जो हमारे चारों ओर फैल गई है और जिसकी गिरफ्त में पृथ्वी के सभी निवासी हैं उसे प्रदूषण कहा जाता है । प्रदूषण को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण । ये तीनों ही प्रकार के प्रदूषण मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं।

वायु और जल प्रकृति-प्रदत्त जीवनदायी वस्तुएँ हैं । जीवों की उत्पत्ति और जीवन को बनाए रखने में इन दोनों वस्तुओं का बहुत बड़ा हाथ है । वायु में जहाँ सभी जीवधारी साँस लेते हैं वहीं जल को पीने के काम में लाते हैं । लेकिन ये दोनों ही वस्तुएं आजकल बहुत गंदी हो गई हैं ।

वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिल जाना है । वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं । जल में नगरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदा पानी प्रवाहित किया जाता रहा है । इससे जल के भंडार; जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है ।

ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है – बढ़ती आबादी के कारण निरंतर होनेवाला शोरगुल । घर के बरतनों की खट-पट, मशीनों की खट-पट और वाद्‌य-यंत्रों की झन-झन दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है । वाहनों का शोर, उपकरणों की चीख और चारों दिशाओं से आनेवाली विभिन्न प्रकार की आवाजें ध्वनि प्रदूषण को जन्म दे रही हैं । महानगरों में तो ध्वनि-प्रदूषण अपनी ऊँचाई पर है ।

प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर नजर आते हैं । प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं । प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं । गंदा जल, जल में निवास करने वाले जीवों के लिए भी बहुत हानिकारक होता है । ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव उत्पन्न करता है । इससे बहरापन, चिंता, अशांति जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है ।

आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना टेढ़ी खीर हो गई है । अनेक प्रकार के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास अब तक नाकाफी सिद्ध हुए हैं । अत: स्पष्ट है कि जब तक जन-समूह निजी स्तर पर इस कार्य में सक्रिय भागीदारी नहीं करता, तब तक इस समस्या से निबटना असंभव है । हरेक को चाहिए कि वे आस-पास कूड़े का ढेर व गंदगी इकट्‌ठा न होने दें ।

जलाशयों में प्रदूषित जल का शुद्धिकरण होना चाहिए । कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग घटा कर सौर-ऊर्जा, पवन-ऊर्जा, बायो गैस, सी.एन.जी, एल.पी.जी, जल-विद्‌युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का अधिकाधिक दोहन करना चाहिए । हमें जंगलों को कटने से बचाना चाहिए तथा रिहायशी क्षेत्रों में नए पेड़ लगाने चाहिए । इन सभी उपायों को अपनाने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण को घटाने में काफी मदद मिलेगी ।

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए कुछ ठोस एवं सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है । रेडियो, टी.वी. , ध्वनि विस्तारक यंत्रों आदि को कम आवाज में बजाना चाहिए । लाउडस्पीकरों के आम उपयोग को प्रतिबंधित कर देना चाहिए । वाहनों में हल्के आवाज वाले ध्वनि-संकेतकों का प्रयोग करना चाहिए । घरेलू उपकरणों को इस तरह प्रयोग में लाना चाहिए जिससे कम से कम ध्वनि उत्पन्न हो ।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है । प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है । सामूहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है ।

पर्यावरण संरक्षण निबंध व नारे Save Environment Essay and Slogan in Hindi

क्या आप पर्यावरण सुरक्षा के महत्व को समझना चाहते हैं?
क्या आप विश्व के पर्यावरण को संरक्षित करना चाहते हैं?

पर्यावरण संरक्षण निबंध व नारे Save Environment Essay and Slogan in Hindi

पर्यावरण संरक्षण पर निबंध Save Environment Essay in Hindi

हम अपने परिवार दोस्तों का तो बहुत ख्याल रखते हैं परंतु जब बात हमारे पर्यावरण के आती है तो हम मुंह मोड़ लेते हैं। जब कोई मुख्य दिन जैसे गांधी जयंती, स्वच्छ भारत अभियान आता है तो हम बहुत उत्साहित हो जाते हैं और उसके कुछ दिनों बाद हम सब भूल जाते हैं। अगर सही मायने में हम सोचे तो पर्यावरण की बात आने पर हम थोड़ा मतलबी हो जाते हैं। आज धीरे-धीरे हम ग्लोबल वार्मिंग और प्रदुषण जैसे आपदाओं से घिरे हुए जो शायद आगे पृथ्वी के विनाश का मुख्य कारण बन जाएंगे अगर हम सही कदम सही समय में नहीं उठाएंगे तो।

हम अपने प्रकृति के सौंदर्य को देख कर कितना खुश होते हैं और उसी प्रकृति को प्रदूषित करते समय सोचते तक नहीं हैं। सरकार की ओर से भी कई प्रकार की योजनाएं और अभियान चलाए जा रहे हैं परंतु हमें लगता है कि सब कुछ सरकार के हाथ में है। ऐसा बिल्कुल नहीं है, जब तक हम स्वयं अपने पृथ्वी की रक्षा करने और अपने वातावरण को प्रदूषित नहीं करने का कसम नहीं खायेंगे तब तक यह असंभव है।

अगर हम सही नज़रिए से देखें तो हम मनुष्य सच में बहुत मतलबी है। अभी हाल ही में सरकार ने दिवाली पर कुछ शहरों में पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया था परंतु देश के ज्यादातर लोग इसकी निंदा करने लगे। यह कितने शर्म की बात है की एक तरफ तो हम अपने पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर देखना चाहते हैं और दूसरी तरफ इस प्रकार के कार्यों से पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं। जब तक हर एक व्यक्ति यह कसम नहीं खा लेता कि पर्यावरण को मुझे ही बचाना होगा और इसे स्वच्छ रखना मेरा कर्तव्य है तब तक पर्यावरण को पूर्ण रुप से बचाना मुश्किल है।

पर्यावरण को हरा भरा रखने के लिए हमें प्रतिवर्ष वृक्षारोपण करना चाहिए। प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर बच्चों को स्कूल में सिखाया जाता है कि हमें वृक्षारोपण करना चाहिए। परंतु बच्चों को पूर्ण रुप से यह सिखाया जाना चाहिए कि हमें प्रति सप्ताह या महीने में एक ना एक पौधा अपने घर के आस-पास जरूर लगाना चाहिए। अगर हम इस तेजी से नहीं सोचेंगे तो हम पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा नहीं कर पाएंगे।

बड़े-बड़े शहरों में आज पर्यावरण ज्यादा दूषित हो चुका है लोगों को ऑफिस और बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। सड़क पर चलते हुए सांस लेना मुश्किल हो गया है। अगर अभी हम अपने पर्यावरण की रक्षा करने के विषय में नहीं सोचेंगे तो कब सोचेंगे?

आज के इस आधुनिक युग में हम टेक्नोलॉजी-टेक्नोलॉजी करते-करते हैं अपने पर्यावरण का खयाल रखना भूल चुके हैं। अगर हमारा पृथ्वी ही नहीं रहेगा और हम भी जीवित नहीं रहेंगे तो प्रौद्योगिकी का क्या लाभ। हमें टेक्नोलॉजी के साथ-साथ पर्यावरण पर भी अपना पूरा ध्यान रखना होगा और अपने गांव और शहर के वातावरण को स्वच्छ और हरा-भरा रखना होगा।

हम लोगों को अपने पर्यावरण  के महत्व को समझना होगा और इसे अपना कर्तव्य समझकर बचाना होगा।  जब तक हम दूसरों पर निर्भर रहेंगे यह असंभव है। हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करने के लिए घर से निकल कर अपने गली-मोहल्ले से इसकी शुरूआत करनी होगी। टेलीविजन या समाचार पत्र पढ़कर या सरकार द्वारा शुरू किये गए अभियानों के द्वारा हम जितना भी उत्साहित हो जाए जब तक हम अपना कार्य शुरू नहीं करेंगे तब तक यह सब बेकार है।

चलिए आज हम सब मिलकर प्रण ले कि अपने पर्यावरण को हम दूषित होने से रोकेंगे, अपने गली-मोहल्ले को स्वच्छ रखेंगे, और अपने पर्यावरण की रक्षा करने के लिए हर सकारात्मक कदम उठाएंगे।

पर्यावरण संरक्षण पर नारे Save Environment Slogans in Hindi

1. पर्यावरण का रखें ध्यान, तभी बनेगा देश महान।

2. पर्यावरण है हम सबकी जान,
पेड़ लगाओ, जग स्वच्छ बनाओ,
करो इसका सम्मान।

3. हम सबका है एक ही नारा,
स्वच्छ सुंदर हो विश्व हमारा।

4. हमको रोकना होगा प्रदूषण,
तभी होगा पर्यावरण का सही पालन-पोषण।

5. आने वाली पीढ़ी है बुद्धिमान और प्यारी,
पर्यावरण की रक्षा है ज़िम्मेदारी हमारी।

6. आओ बच्चों समझें एक बात ज्ञान की,
पेड़ पौधे करते हैं रक्षा हमारे प्राण की।

7. प्रकृति का ना करें हरण, आओ बचाएं पर्यावरण।

8. वातावरण को शुद्ध बनाना होगा,
प्रदूषण मुक्त विश्व बनाना होगा।

9. वृक्ष, पानी और स्वच्छ हवा,
यह तीन है जीवन रक्षा की अनमोल दवा।

10. पेड़ पौधों को ना करो नष्ट,
वरना सांस लेने में होगा कष्ट।

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